Tuesday 19 January 2010

रोका जा सकता है ग्लोबल वार्मिगं या मौसम परिवर्तन

हमारा वायु मंण्डल हवा के व्यावसायिक दोहन के कारण छोटा होता जा रहा है।
इसी के कारण गर्मियों मेँ अधिक गर्मी तथा जाडोँ मेँ कडाके की सर्दी पड रही है।प्रकृति मेँ आ रहेँ इन परिवर्तनोँ को ग्लोवल वार्मिग कहना ( ठंड से दम तोडते लोगोँ व कोहरे के कारण प्रभावित रेल और हवाई सेवायेँ , सडकोँ पर कछुवेँ की चाल से चलते वाहनोँ) के साथ
क्या यह अन्याय नहीँ है ? यदि यह ग्लोवल वार्मिग ही है तो ठंड से पीडित लोगोँ को थोडी सी राहत तो मिलनी चाहिए थी।

4 comments:

Dr. shyam gupta said...

kyaa hai havaa kaa vyavasaayik upayog ??

shama said...

Aapka swagat hai..agali post ka intezaar!

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

संगीता पुरी said...

इस नए ब्‍लॉग के साथ आपका हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. आपसे बहुत उम्‍मीद रहेगी हमें .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!